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How an ad is created- कैसे बनता है एक ad

by | May 18, 2021 | Uncategorized | 0 comments

Advertisement   भी  Promotion  और Marketing  का एक हिस्सा है।  समय के साथ जिस तरह Digital Age  के चलते Digital Marketing के कारण Marketing  में बदलाव आया उसी तरह Advertising  Industry  में भी बदलाव आये लेकिन Ad  बनाने के पीछे की कहानी वही रही। और  इसी कहानी को जान कर और समझ कर कई लोगो ने अपना करियर बना लिया।  
कई महिलाये जिन्हे किसी कारण वश अपने Job   से break  लेना पड़ा उन्हें भी Advertising ने एक सफल करियर दिया और वो भी home  maker  से successful  business  woman  बन पायी , कारण  सिर्फ एक – advertising  के लिए उनका attraction .  

   क्या आप भी उन लोगो में से हैं जो  टीवी , रेडियो या  यूट्यूब पर चलते advertisement को देख कर रुक जाते हो ?

क्या आपको भी ad  attract  करते हैं ?

क्या आप भी जानना चाहते हैं कि  कैसे बनते हैं ये amazing ads ?

तो चलिए चलते हैं behind  the scenes और जानते हैं कि  कैसे तैयार होता है एक ad.

How an ad is created

 

Why  Advertise ?

मान लीजिये कि हमारे पास कोई client  आया है और वो हमसे एक ad  बनवाना चाहता है.

सबसे पहले हमें  जानना होगा कि  ad  बनवाने के पीछे उसका उद्देश्य यानि motive  क्या है. Generally  एक ad  बनाने के पीछे इनमे से कोई एक दो-तीन  कारण  हो सकते हैं :-

1. Branding  

2. Sales

3 . Location  change 

4 . New  Stock

5 . PSA

यह जानना हमारे लिए बहुत ज़रूरी है की ad बनाने के बाद client  क्या result  चाहता है, क्योंकि end  result  के ऊपर depend  करेगा कि उस ad  को बनाने की हमारी approach  क्या होगी। 

ऐसा क्यों और कैसे होगा इसे  एक example से समझते हैं।  मान लीजिये हम किसी clothing  स्टोर पर गए।  वह हमने sales man  से  T -Shirt  दिखाने  को कहा।  Sales  man  ने बिना यह जाने कि हम T – Shirt किस purpose से ले रहे हैं  हमें 10 -12 options  दिखा दिए लेकिन हमें तो party wear  T -Shirt  चाहिए थे लेकिन उसने सारे  options  daily  wear  के बताये। ज़ाहिर है कि  हमें एक भी option पसंद नहीं आएगा।  अब या तो हम उस दुकान से दूसरी दुकान पर चले जायेंगे या फिर हम sales  man  को बोलेंगे की मुझे Party Wear  T -Shirt  चाहिए। दोनों की cases  में Time  और Effort  waste हुए।  अगर आप दूसरी Shop   पर   चले गए तो इस shop का business  भी चला गया,  और यह सब हुआ सिर्फ इसलिए क्योंकि Sales  man  ने सबसे पहले  यह नहीं पूछा  कि  हमारे T -Shirt लेने का Purpose क्या है।  अगर वह पहले ही पूछ लेता की Daily  Wear  दिखाऊ या Party  wear  तो आप अपनी Choice  उसे बता सकते थे, और यह एक स्मार्ट Salesmanship होती।  इसी तरह बिना यह जाने की Client  Ad क्यों करना चाहता है , अगर हम एक ad तैयार कर देते हैं तो हो सकता है कि  client  का purpose solve  न हो और वो कह दे कि मज़ा नहीं आया।  हर ज़रूरत के लिए ad  अलग बनता है। उसे बनाने  और conceptualize करने  की process अलग -अलग होती है।  सिर्फ यही नहीं हर प्रकार के ad  का communication  भी अलग होता है। 

 

USP यानि Unique  Selling Preposition

यानि वो बात जो client  के product  या service  को भीड़ से अलग बनती है। 

सबसे साफ़ धुलाई , सबसे तेज़ internet , हाथों पर नरम- मैल  पर सख़्त , ज़ंग रोधक सीमेंट , 1 लाख kilometer  चलने वाला टायर यह कुछ examples  हैं जो बताते हैं कि  product  या service अपने competitor  product  या service  से कैसे अलग है। 

अपने आस-पास नज़र डालिये आपको कई USPs नज़र आएंगी।

जब हम यह समझ लेंगे की client  के product  या service की USP क्या है  तो हमें हमारे ad  का hero मिल जायेगा।

 

Understanding  T.G. 

TG  यानि Target Group,  यानि वो लोग जो  इस product  या service  को use  करेंगे या जो इस product  या service  को buy  करने में important  role  play  करेंगे। 

Example  :

Tyre का use male और female  दोनों अपने व्हीकल में करते हैं लेकिन टायर लेने का decision  generally males  करते हैं।  तो tyre  companies का TG है male.

Baby soaps का use baby करता है लेकिन baby soap कौन सा लेना है इस बात का फैसला mummy  करती है।  तो बेबी products companies  के लिए TG  है mothers.

Mobile का use  हर उम्र के male  और female  दोनों करते हैं लेकिन latest  phones  ka  use youngesters  ज़्यादा करते हैं।  तो latest  technology  वाले phone  के लिए TG हुआ youth ( generally college जाने वाले या जिनकी अभी अभी नौकरी लगी है ) – male  और female  दोनों. लेकिन अगर यही मोबाइल office के कामो के लिए helpful  है, जैसा की Blackberry था, तो उस मोबाइल कंपनी का TG youth  से शिफ्ट हो जायेगा office  goers पर और ऐसे office  goers  पर जो thode  senior  पोस्ट पर हों। 

 TG सिर्फ gender या occupation या marital  status तक ही सीमित नहीं है. TG  समझने के लिए हमें कई parameters  समझने होंगे।

 

Age group

हर age  ग्रुप की बातें, उन्हें  trigger  करने का emotion , उनकी पसंद – नापसंद , उनकी decision making ability यानि निर्णय लेने की क्षमता, उनका humor सब अलग अलग होता है।  इसीलिए 15 साल के बच्चे और 45 साल के उनके  parents के लिए ad अलग अलग होगा। 

 

Demographics

कई सारे parameters को एक साथ demographics कहा जाता है।  जैसे Age, Income group, Location, Education level, Gender, Occupation, Family status.

 

Pain Points

TG के pain  points  समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि कोई भी product  या service  तभी बेचीं जा सकती है जब वो customer  को releif  दे या  उसकी ज़रूरत को पूरा करे ।  अगर as a  customer  या client  कोई product  या service  मुझे मेरी problem  का solution देती है तो उसे लेने में मैं ज़रा भी देर नहीं करूँगा.Pain Points

 

Where does TG hangout

यानि TG कहा उठता बैठता है, उसकी life style  कैसी है, वो किन किन तरह के लोगो के साथ दोस्ती करता है, उसकी life  में क्या चलता है , उसका social  circle  कैसा है। TG के बारे में यह सारी  जानकारी हमें TG को समझने और उसके मुताबिक, उससे relate करने वाली कहानी या though  पर काम करने में मदद करेगी। 

अगर मेरा product sports  bike  है तो ज़ाहिर है की इसका TG Youth  ही है।  लेकिन अगर bike बहुत premium  class  के लिए है तो मेरा youth टपरी पर चाय नहीं पियेगा, बल्कि  cafe  में  बैठेगा। इसी प्रकार अगर मेरा TG 60 + का इंसान है तो वो  शायद किसी  park  के  laughing  club  में मिलेगा न की gym  में।  

 

Creative Process

अभी तक हमने अपने client  के client  यानि end  consumer  को समझने के लिए research  किया।  इस research  से हमारे पास बहुत important data  आ गया जो हमें   ad बनाने की आगे की steps  में बहुत help  करेंगी।   

अब चलते हैं ad  बनाने की creative  process  की ओर। 

सबसे पहले हम सोचते हैं एक IDEA .

Idea

एक अच्छे advertisement के लिए जरूरी है एक अच्छा आइडिया। Idea यानि  Thought जिस पर पूरा ad  बना हो। Idea जितना strong होगा , Ad उतना अच्छा बनेगा। Example के लिए यह Ad देखिए:

Google Reunion

 क्या आप इसका Idea  पकड़ पाए? ज़रा ध्यान से सोचिये क्या है इसका Idea . इसका Idea simple  है – जो इस दुनिया में है वो ढूंढा जा सकता है Google पर।

एक अच्छे  Idea  में कुछ  बातें होना ज़रूरी है।  जैसे

Insight

Idea  generate करना आसान नहीं होता।  एक ही Product को लेकर कई Ideas हो सकते हैं, लेकिन Idea  वही अच्छा होगा जिसमें  Insight होगी। Insight यानि Human Behaviour का वह पहलू,  जो हमें पता तो होता है  लेकिन हम उसके बारे में Unaware रहते हैं या उस पर ज़्यादा गौर नहीं करते ।  नहीं समझे? चलिए, Snicker  का यह Ad  देखते हैं  फिर बात करते हैं Insight  पर

Snickers

हम सभी को पता है की भूख लगने पर हम सब चिढ-चिढ करने लगते हैं।  ज़रा ज़रा सी बात पर हम गुर्राने लगते हैं।  बहुत ज़्यादा भूख लगने पर अगर जल्दी से कुछ खाने को न मिले स्थिति और खराब हो सकती है।  बस , यही है Human  Behaviour  का वह पहलु जो बना इस Ad का Insight.  अब एक और example से  Insight  को समझते हैं।  हम सभी को पता है कि छोटे बच्चों को एक जगह बैठाकर रखना मुश्किल होता है। जब भी हम उन्हें कहते हैं कि यहीं बैठना, वो अगले ही पल उठ कर चल देते हैं।  यह हम सभी ने अपने घर में , आस-पड़ोस में ज़रूर  देखा है।  यह Insight  एक  Award  Winning  और Most  Recalled Ad  Campaign  में काम आयी।  चलिए देखते हैं

Fevicol

Insight  हमारी Daily  Routine , Daily  Life , का ही हिस्सा है।  हम बस उसे Granted लेते हैं या रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में नज़रअंदाज़ करते हैं। अगर हमने Insight  पकड़ ली तो Idea  आना आसान होगा, लेकिन Insight  पकड़ने के लिए ज़रूरी हहि Observation . हमारे आस-पास होने वाली छोटी-छोटी चीज़ों को Observe  करना ही Insight  Develop  कराती है।

एक अच्छा ad Human  Emotion  को touch  करता है

जब हम Emotion  शब्द बोलते हैं तो Generally  हमारे मन में सिर्फ वो भाव आते हैं जिसमे लोग रो पड़ते हो, लेकिन इमोशन कई होते हैं  : 

Guilt, Shame, Envy, Gratitude, Ego, Sorrow, Pitty, Rage, Dream, Thrill, Misery, Frustration, Loss, Insecurity, Responsibility, Greed, Elation, Gloom, Superiority, Loneliness, Fear, Fondness, Irritation, Desire,  Neglect, Disgust, Arousal, Sharing, Disappointment, Hospitality, Humiliation, Delight, Hate, Love, Surprise, Regret, Kindness, , Humor, Panic, Nurturing, Excitement, Agitation, Optimism, Attraction, Responsibility, Sadness,  Bliss, Embarrassment, Hope, Denial,  Relief, Fascination,  Worry,  Devotion, Contempt, Expectation, Alarm, Warmth, Inspiration,  Empathy, Pleasure, Awe, Power.

चलिए इनमें  से कुछ  Emotion  पर बने  Ad  समझते हैं। 

 

                                                                           Guilt                                        

Agitation

 

                     
Humour 

 

बाकि आप भी अपनी रिसर्च करिये और comment  बॉक्स में लिख कर बताइये की कौन से emotion  पर आपको कौन सा ad  याद आता है। 

Story  of  the  ad  should  be  catchy यानि ad  की story  catchy होना चाहिए

एक idea  पर कई stories  हो सकती हैं। Bolywood  में भी सिर्फ love  story  पर कई फिल्म बनी लेकिन कुछ superhit  रहीं और कुछ का नाम लोगो को याद भी नहीं रहा।  ऐसा क्यों ? जब कोई कहानी catchy हो, या उस कहानी में हम audience  का interest  बाँध  कर रख सके तो वह कहानी successful होती है। 

 

 

 

ये सारे ad  एक ज़बरदस्त कहानी कह रहे हैं।  हर ad  interesting  है और audience को बांधने में सक्षम है.

अगर मुझे किसी Plywood का ad करना है तो यह एक boring category है। लेकिन इस boring category को भी बड़ी interesting तरीके से पेश किया Mayur Ply के इस ad ने।

Mayur Ply

Medium  कोई भी हो – Print , TV , Radio या Internet , अगर कहानी catchy  है तो जनता रुकेगी।

 

ad की कहानी TG  से relate  करे 

हम सब अपनी कहानी, अपनी fantasy को real  होते देखना चाहते हैं।  हम अपने मुँह से कहें या न कहें लेकिन दिल के किसी कोने में हम सभी चाहते हैं की हम भी हीरो बने।  अगर Ad  ऐसा हो जिससे हमारा TG  relate  कर सके तो वह ad  पॉपुलर हो सकता है।  एक आम आदमी या हमारे TG  को लगना  चाहिए कि  ad  की कहानी तो मेरी अपनी है या मन के किसी कोने में मैं भी ऐसा ही सोचता हूँ। 

 

 
 

Ambuja Cement

इसे देखने वाले हर इंसान  ( TG ) को अपना बचपन याद आ रहा होगा।  इसका TG  है  30 + age group  का व्यक्ति क्योंकि वही अपना घर बनवाता है। उसका बचपन कुछ इसी तरह बीता है  क्योंकि तब FLAT  system  नहीं हुआ करते थे।  बचपन में सब गाँव में या छोटे शहरो में रहते थे और वहाँ  के घर इसी तरह से बने होते थे।   

 

Execution

अब हम आ गए हैं ad  बनाने की last  process पर।  एक अच्छे idea को , एक अच्छी और catchy  story को एक अच्छा execution  मिलना बेहद ज़रूरी है।  Writer, Art director, Sound engineer, voice artist , ad director ये सब मिलकर उस script को एक शानदार commercial के रूप में present करते हैं।  अगर radio  ad  है तो Writer के बाद sound  engineer , voice  artist, ad  director  involve  होते हैं।  अगर एक Film  है (advertising की language  में video  ad  को film  कहते हैं)  तो director , artists , set  designer , editor , और voice  artist उस ad script  में चार चाँद लगाते हैं और इस तरह बनता एक ad .

 

 

तो कैसा लगा ad  create  होने की पूरी process  जानकर ?  शायद आपको समझ में आया होगा की कैसे बनता है एक  Ad.  अपने सवाल, doubt, suggestion या  reaction  comment  box  में ज़रूर लिखिए। और आप ad  world  से जुडी किन किन बातों  को जानना चाहते हैं, मुझे बताते रहिये ताकि मैं  आपके लिए ऐसे ही indepth  blogs  ready  कर सकूँ।